गणेशोत्सव मंडलों पर जीएसटी का बोझ
मुंबई : राज्य सरकार ने गणेशोत्सव को पूरे उत्साह के साथ मनाने के लिए कोरोना महामारी के सभी प्रतिबंध तो हटा लिए हैं, लेकिन इस उत्सव पर जीएसटी जैसे टैक्स का बोझ गणेशोत्सव मंडलों पर जस का तस पड़ा है। ऐसे में मुंबई सहित ठाणे के अनेक ठिकानों पर इस टैक्स को लेकर मंडलों की चिंताएं बढ़ गई हैं। एक तो कोरोना महामारी के चलते मंडलों को जनता से मिलनेवाले चंदे की रकम बहुत कम मिलने से मंडलों का बजट गड़बड़ाया है, दूसरी तरफ जीएसटी एवं अन्य टैक्स मिलाकर लगभग २० प्रतिशत रकम सरकारी तिजोरी में जमा करना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में गणेशोत्सव मंडलों के पसीने छूट रहे हैं। इस स्थिति में गणेशोत्सव को पूरे उत्साह के साथ कैसे मनाएं, यह सवाल मंडलों ने सरकार के समक्ष पेश किया है।
राज्य में सत्ता में आते ही शिंदे-फडणवीस सरकार ने तुरंत गणेशोत्सव के लिए सभी कोरोना प्रतिबंधों को हटा दिया और खूब ढोल पीटकर वाहवाही बटोरी। सरकार के इस फैसले से गणेश भक्तों में उत्साह का वातावरण भी दिखा, लेकिन अब टैक्स के ग्रहण को देखते हुए गणेशोत्सव मंडलों को कुछ अलग ही चित्र दिख रहा है। जीएसटी सहित अन्य टैक्स के मामले को लेकर गणेशोत्सव मंडलों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से चर्चा कर इसे हटाने की मांग की थी। सरकार ने तब तो सिर हिलाया था लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में गणेशोत्सव मंडलों की चिंताएं बढ़ना लाजिमी है। सरकार का कोई निर्णय न आने से गणेशोत्सव मंडलों में काफी नाराजगी भी देखी जा रही है।
बता दें कि महामारी के दौरान सार्वजनिक उत्सव मंडलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ज्यादातर लोगों ने अपेक्षाकृत चंदा नहीं दिया है। इसलिए गणेश और नवरात्रोत्सव जैसे त्यौहार मनानेवाले मंडलों का बजट गड़बड़ा गया है। मंडलों को मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
