कृषि माल की उत्पादकता, विपणन और निर्यात पर जोर
मुंबई : देश में कृषि क्षेत्र में परिर्वतन लाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की अध्यक्षता में नियुक्त की गई मुख्यमंत्रियों की हाई पावर कमेटी की दूसरी बैठक शुक्रवार को सह्याद्रि गेस्ट हाऊस में हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री फड़नवीस, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप साही, उड़ीसा के कृषि मंत्री अरुण कुमार साहू उपस्थित थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से भाग लिया। समिति की पहली बैठक में रखे मुद्दों पर अन्य राज्यों की तरफ से रखे गए मतों को एकत्रित कर उनका प्रस्तुतीकरण समिति के सदस्य सचिव रमेश चंद्र ने किया। बाजार समिति के कानून में सुधार, अनुबंध खेती, खेती में नई तकनीक, आवश्यक वस्तु अधिनियम से कृषि उत्पादों को बाहर करने, ईनाम, कृषि निर्यात आदि विषयों पर बैठक में चर्चा हुई। इस दौरान राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों ने अपनी राय रखी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी मुद्दों पर चर्चा पर अगले सप्ताह भर में सभी राज्य अपने-अपने सुझाव देंगे और अगले 15 दिनों में नीति आयोग के साथ सभी राज्यों के कृषि विभागों के सचिवों की बैठक होगी। इसकी रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार कर उसे मुख्यमंत्रियों की समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। तकरीबन डेढ़ माह में रिपोर्ट को फाइनल कर उसे प्रधानमंत्री को पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की उत्पादकता, विपणन और कृषि माल के निर्यात जैसी बातों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रधानमंत्री को पेश करेगी। सभी राज्यों की आम सहमति से तैयार इस रिपोर्ट के माध्यम से देश के कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। बाजार समिति कानून में संशोधन कर किसानों को उचित मूल्य देने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल एक्ट तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में राज्यों को इसे स्वीकार करने को लेकर चर्चा हुई। आवश्यक वस्तु अधिनियम से कृषि क्षेत्र संबंधी कौन सी बातों को अलग किया जाए, जिससे कृषि उत्पादों की कीमतें कम न हों, इस पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ाने के प्रयास करना, केंद्र प्रायोजित योजना को राज्य में लागू करने पर चर्चा हुई। इस बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि वस्तुओं के निर्यात को बढ़ाने पर अधिक जोर है। इसके लिए एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) संस्था के माध्यम से प्रयास किए जाएंगे। कृषि और वाणिज्य को एकत्रित कर कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार एपीडा माध्यम से दिए जाने पर बैठक में जोर दिया गया। कीटनाशक रहित फसल क्षेत्र घोषित करने, जैविक कृषि उत्पादन के मानक तैयार करने सहित अन्य राज्यों ने जो कृषि क्षेत्र में सुधार किए हैं, उनमें से कुछ को स्वीकार कर संपूर्ण देश के लिए लागू करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीक लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। देश में खाद्य तेल का सर्वाधिक आयात होता है, यह कम कर तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर अधिक जोर देने पर चर्चा हुई। जीएम (जेनेटिकली मोडीफाइड) प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है या नहीं, इस पर अन्य राज्यों के मत मांगे गए हैं। फसल पद्धति में बदलाव करते हुए कृषि उत्पाद से सहायक ईंधन तैयार करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने और इससे उन्हें बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किए जाएगा।
