रूस से मिसाइल करार, अमेरिका से नहीं दरार

अमेरिकी दबावों को दरकिनार कर भारत ने रूस के साथ S-400 मिसाइल डील शुक्रवार को सील कर ली। देश की हवई सुरक्षा को बेहद सुरक्षित बनाने वाले इस मिसाइल सिस्टम को रूस से खरीदने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार को यहां समझौते पर दस्तखत हुए। इसके तहत भारत 40 हजार करोड़ की लागत से ऐसे 5 मिसाइल सिस्टम खरीदेगा। अगले साल के आखिर तक भारत को इसकी सप्लाई भी होने लगेगी। इस सौदे के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्तों में कोई दरार नहीं आई है।

इस मिसाइल सिस्टम से पाकिस्तान और चीन, दोनों ही पड़ोसियों से होने वाले खतरे से भारत एक साथ निपट सकेगा। वहीं, यह सौदा भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत भी है। एक दिन पहले तक इस डील पर आंखें दिखाने वाला अमेरिका भी रूस के साथ समझौते के बाद नरम पड़ा। अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि हमारे प्रतिबंधों का मकसद रूस को दंडित करना है, उसके घातक बर्ताव और उसके डिफेंस सेक्टर में फंडिंग को रोकना है, न कि अपने सहयोगियों की सैनिक क्षमता को नुकसान पहुंचाना। गौरतलब है, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से कारोबार करने वाले देशों पर प्रतिबंध के लिए अमेरिका ने CAATSA कानून पास किया है। आतंक पर पाक को इशारों में घेरा साझा बयान में पाक का नाम लिए बिना सीमापार आतंकवाद और आतंकियों को पनाह देने की कड़ी निंदा की गई। बिना दोहरे मानदंड के अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर निर्णायक भूमिका निभाने पर सहमति बनी। भारत लगातार पाक पर सीमापार से आतंक फैलाने और पड़ोसी देशों को निशाना बनाने वाले समूहों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। पाक के रूस से बेहतर होते रिश्तों की खबरों के बीच यह कड़ा बयान काफी अहम है।

गगनयान, बाघों को बचाने में मदद 13वें भारत-रूस सालाना शिखर सम्मेलन पर भारत-रूस के बीच स्पेस, एटमी ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, रेलवे समेत कई क्षेत्रों में सहयोग के बड़े समझौते हुए। 

इंसान को स्पेस में ले जाने वाले भारत के गगनयान प्रोजेक्ट और बाघों को बचाने में रूस सहयोग करेगा। कुडनकुलम का दूसरा एटमी प्लांट इसी साल भारत को मिलेगा। रूस 6 अन्य एटमी प्लांट भी बनाएगा, लेकिन उन जगहों के नाम तय नहीं हैं।