औरंगाबाद जैसा हादसा टला, अलर्ट ट्रेन ड्राइवरों ने बचाई 40 मजदूरों की जान
औरंगाबाद : रेल हादसे में 16 प्रवासी मजदूरों की मौत को लोग भुला नहीं पाए हैं, ऐसे दो और बड़े हादसे होते-होते बच गए। शुक्रवार को पुणे और शनिवार को बीरभूम के नलहटी में दो बड़ी ट्रेन दुर्घटनाएं ड्राइवरों की सूझबूझ से टल गईं। अलर्ट ट्रेन ड्राइवरों ने ट्रैक पर चलते प्रवासी मजदूरों को दूर से ही देख लिया और समय रहते ब्रेक लगा दिया।
शुक्रवार तड़के महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुए रेल हादसे में 16 प्रवासी मजदूरों की जान चली गई थी। ट्रैक पर थककर सो रहे मजदूरों के ऊपर से मालगाड़ी गुजर गई थी। शुक्रवार को ही पुणे के पास भी ऐसा ही हादसा होने से बच गया। मालगाड़ी के ड्राइवर ने समय रहते ब्रेक लगा दिया और ट्रैक पर जा रहे 20 प्रवासी मजदूरों से कुछ फीट की दूरी से पहले ट्रेन रुक गई।
उधर पश्चिम बंगाल के बीरभूम में कोई सवारी या सामान ढोने वाली गाड़ी न मिलने पर कई मजदूर पैदल ही अपने घर झारखंड के लिए निकल पड़े। ये लोग अलग-अलग ग्रुप में थे और सभी को तारापीठ इलाके में एक-दूसरे से मिलना था। यहां पहुंचने पर भी इन्हें पता चला कि इनके पास पैदल चलने के अलावा और कोई चारा नहीं है।
इनमें से कुछ लोग रात 9 बजे के आसपास रेलवे ट्रैक पर चलने लगे। रात के 9:30 बजे सामने से आ रही एक निरीक्षण ट्रेन के ड्राइवर ने इन्हें देख लिया और समय रहते ब्रेक लगा दिया। नलहटी के बीडीओ जगदीश चंद्र बरुई ने कहा, 'इन्हें खाना और रहने का स्थान दिया गया है। इन्हें सुरक्षित घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है।' प्रवासी मजदूरों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
