ऊर्जा क्रांति’ से चार ट्यूब लाइट, रेफ्रिजरेटर और टीवी चलाए जा सकते

बदलापुर : बदलापुर के चोन गांव के रहनेवाले आदिवासी रामचंद्र खोड़का (४६) ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसा जनरेटर बनाया है, जिसमें न तो बिजली की जरूरत है और न डीजल की। जिसका उन्होंने `ऊर्जा क्रांति’ नाम दिया है। इस `ऊर्जा क्रांति’ से चार ट्यूब लाइट, रेफ्रिजरेटर और टीवी चलाए जा सकते हैं। इसके अलावा इससे इलेक्ट्रिक कार को भी चार्ज किया जा सकता है।

बता दें कि रामचंद्र ने १०वीं पास करने के बाद आईटीआई से `वेल्डर’ का कोर्स किया। फिलहाल वे कर्जत में एसटी बस डिपो में काम करते हैं। उन्होंने बिजली बिल से बचने के उद्देश्य से यह जनरेटर बनाया है। यह एक केवीए क्षमतावाला गैर-बिजली जनरेटर है। इस क्षमता को ३५ केवीए तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके पहले वे ऑटोमेटिक पंप भी बना चुके हैं, जो कि पानी के प्रेशर से चलता है इससे किसानों को खेती में सिचाई के लिए बहुत मदद मिलती है।

इस जनरेटर में एक टरबाइन जैसी मशीन का इस्तेमाल किया गया है। इसे चलाने के लिए बैटरी या स्टार्टर की जरूरत होगी। जब टरबाइन चलता है, तो उससे मिलनेवाली एनर्जी से बैटरी भी चार्ज होती है और बिजली से उपकरण भी चलते हैं। इसके बाद आप बैटरी को अलग कर सकते हैं। यह फुल चार्ज बनी रहेगी। दरअसल बाजार में उपलब्ध जनरेटर में आर्मेचर को बदला गया है। इस `ऊर्जा क्रांति’ का निर्माण  कैपेसिटर, ट्रांसफॉर्मर वगैरह जैसी कई चीजों का उपयोग करके किया गया। इस जनरेटर को शुरू करने के लिए एक छोटी बैटरी दी गई है। इसके अलावा किक के लिए पैडल, रॉड या हैंडल दिया जाता है।

ऊर्जा क्रांति’ का आइडिया रामचंद्र खोड़का का अपना है। उन्होंने रामचंद्र खोडका पावर सिस्टम (ई-२ / ११३४/२०१६) के नाम से एक पेटेंट के लिए आवेदन किया है। `नो मैग्नेट, नो फ्यूल, नो इलेक्ट्रिसिटी’ के सिद्धांत पर ऊर्जा क्रांति’ एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। `ऊर्जा क्रांति’ को बहुत अधिक रख-रखाव की भी जरूरत नहीं होती है। जनरेटर की विशेषताएं: कोई बिजली बिल नहीं जाएगा। खेती के लिए एक पंप इससे चला सकते हैं। इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज किया जा सकता है।