उच्च न्यायालय ने अपहरण और हत्या मामले में दो लोगों को बरी किया

मुंबई, बंबई उच्च न्यायालय ने अपने पूर्व नियोक्ता के 12 साल के बेटे के अपहरण और हत्या के मामले में दो लोगों की दोषसिद्धि और सजा बुधवार को रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध में उनकी संलिप्तता साबित करने में नाकाम रहा। न्यायमूर्ति बी पी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति स्वप्ना जोशी की खंडपीठ ने इम्तियाज शेख और आजाद अंसारी की अपील मंजूर कर ली, जिसके जरिये सत्र अदालत के मई 2018 के फैसले को चुनौती दी थी। इन दोनों की उम्र 27 वर्ष है और यह घटना 2012 की थी। निचली अदालत ने शेख को मृत्युदंड, जबकि अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उनकी अपीलें स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन दोनों के खिलाफ संदेह से परे मामला साबित करने में नाकाम रहा। पीठ ने कहा कि अभियोजन यह भी साबित करने में नाकाम रहा कि जिन नंबरों से लड़के के पिता को फोन किए गए थे, वे आरोपी व्यक्तियों के ही थे। अदालत ने कहा कि अभियोजन संतोषजनक सबूत के साथ यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपियों ने फिरौती मांगने के लिए फोन कॉल किये थे। अभियोजन के अनुसार, शेख और अंसारी ने नौकरी से निकाले जाने का बदला लेने के लिए 27 मई 2012 को अपने पूर्व नियोक्ता के बेटे का कथित तौर पर अपहरण कर लिया। उन्होंने लड़के को पड़ोसी ठाणे जिले के भिवंडी ले जाने के बाद उसी रात कथित तौर पर गला दबा कर उसकी हत्या कर दी।