मुंबई में मर्डर के बाद लखनऊ में बना पासपोर्ट, यह हत्यारा कैसे हुआ नौ दो ग्यारह!

मुंबई 
किसी भी संगीन अपराध के बाद आरोपी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाता है, ताकि यदि वह देश से बाहर भागने की कोशिश करे, तो सभी एयरपोर्ट्स पर उसके वहां पहुंचते ही जांच एजेंसियों के पास अलर्ट आ जाए। लेकिन नौशाद शोयब खान नामक अपराधी कई वारदात के बाद भी सऊदी अरब नियमित आता-जाता रहा। सौभाग्य से शुक्रवार को उसका देश छोड़ने का प्रयास सफल नहीं हुआ। सीनियर इंस्पेक्टर अशोक खोत ने उसे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। नौशाद यूपी के आजमगढ़ का मूल निवासी है। साल 2010 में वह घाटकोपर के अशोक नगर में रहता था। घाटकोपर में जूलर भरत सिंह की जूलरी की दुकान थी। भरत दुकान में जूलरी नहीं छोड़ते थे। वह इसे रोज घर से दुकान और दुकान से घर ले जाते। नौशाद को कहीं से इसकी टिप मिल गई। 13 अप्रैल, 2010 को वह अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा और लूटने के मकसद से भरत को गोली मार दी। जूलर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पब्लिक इलाके में जमा हो गई, इसलिए आभूषण नहीं उठा पाया और वहां से भाग लिया। 


हर अपराध के बाद भागता रहा सऊदी अरब
 
जूलर की हत्या के बाद वह मुंबई से आजमगढ़ गया। कुछ दिन वहां छिपने के बाद लखनऊ आया। वहां से अपने मूल नाम से पासपोर्ट बनवाया। खास बात यह है कि पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन होना बहुत जरूरी है। पासपोर्ट बनवाने की कई शर्तों में एक शर्त यह भी होती है कि आवेदक के खिलाफ कोई पुलिस केस तो नहीं है। नौशाद के खिलफ मुंबई में मर्डर जैसा संगीन केस हुआ, बावजूद इसके वह लखनऊ में पासपोर्ट बनवाने में कामयाब हो गया। इस पासपोर्ट पर उसी साल सऊदी अरब गया। वहां उसने छह महीने ड्राइवर के तौर पर नौकरी की। 

2011 में वह अहमदाबाद लौटा और नादियाड में गाड़ियां ड्राइव करने लगा। 2014 में वह फिर सऊउी अरब गया और अगले साल आजमगढ़ में अपने मूल गांव लौटा। वहां उसने एक पारिवारिक विवाद में अपने साले को गोली मार दी। उस केस में वह गिरफ्तार हुआ, लेकिन कुछ महीने बाद जमानत पर बाहर आ गया। पिछले साल वह वापस मुंबई आया और घाटकोपर के अशोक नगर में किसी की हत्या की कोशिश की। उसके खिलाफ साकीनाका पुलिस स्टेशन में भी साल 2006 में दो एफआईआर दर्ज हुई थीं। 9 साल पहले घाटकोपर के एक अन्य केस में भी वह आरोपी है। फिर भी यूपी के बने पासपोर्ट पर विदेश घूमता रहा।