फिल्मी अंदाज में प्रापर्टी डीलर की हत्या, पार्टनरों ने एक माह में रची प्लानिंग, पढ़ें-खौफनाक वारदात

सुखदेव नगर से छह दिन से लापता प्रॉपर्टी डीलर नरेश शर्मा की पैसों के लेनदेन के चलते पैराडाइस कार बाजार कंपनी के मालिक सहित तीन आरोपियों ने मिलकर गला घोंटकर हत्या कर दी। पैराडाइस कंपनी के मालिक ने नरेश से 15 लाख उधार लिए थे, जिसमें से 8 लाख वह वापस कर चुके थे, लेकिन नरेश ने बकाया 7 लाख देने का भी दबाव बनाया तो उन्होंने हत्या से एक माह पहले पूरी प्लानिंग की और उसमें उन्होंने कुल दो लोगों को और जोड़ा। 

वह 6 फरवरी को बकाया पैसे देने के बहाने सेक्टर 13-17 स्थित अपने ऑफिस ले गए और वहां पर तीनों ने डीलर की गला घोंटकर हत्या की। उसके बाद डीलर की गाड़ी में उसका शव डाला और दो गाड़ियों के साथ करनाल की तरफ चल दिए। सीसीटीवी में न आए इसलिए उन्होंने पानीपत और करनाल टोल टैक्स की बजाय दूसरा रास्ता अपनाया और 6 फरवरी को ही देर रात शव को बूढ़नपुर के पास नहर में फेंका और उसके बाद सबूत मिटाने के लिए गाड़ी को भी नहर में धक्का दे दिया। वहीं, पांच दिन से लगातार आरोपियों की धरपकड़ में जुटी सीआइए टू और डिटेक्टिव टीम ने भैंसवाल चौके के पास से दबोच लिया और पुलिस पूछताछ के लिए न्यायालय में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।

रेकी कर रहे आरोपी सुनील उर्फ निती ने प्रॉपर्टी डीलर नरेश शर्मा के ऑफिस से निकलने से करीब पांच मिनट पहले ही पुलकित और चेतन को मौके पर पहुंचकर सूचना दे दी थी। वहीं, स्काईलार्क पर जैसे ही नरेश शर्मा अपनी कार में सवार होकर पहुंचा तो पुलकित और चेतन ने नरेश शर्मा को गाड़ी रुकवाया और बचे हुए पैसे लौटाने के बहाने सेक्टर 13-17 में बने अपने ऑफिस पर ले गए। 

ऑफिस के अंदर जाने के बाद तीनों ने गला दबाकर नरेश शर्मा की हत्या कर दी और शव को उसी की इटियोश कार की डिग्गी में डालकर सेक्टर-18 से जीटी रोड घरौंडा से फुरलक रोड, स्टौंडी के रास्ते 10 बजे के करीब नहर पर पहुंचे और नरेश शर्मा के शव को कार कि डिकी से निकालकर शव नहर में डाल दिया। इसके कुछ देर बाद कार को भी नहर में डाल दिया। वहां से तीनों आरोपी साथ ले गए अपनी डिजायर कार में सवार हो उसी रास्ते से सेक्टर-13/17 में अपने ऑफिस आए इसके बाद तीनों अपने-अपने घर चले गए थे।

आरोपियों की पहचान पुलकित मदान निवासी ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी पानीपत के रूप में हुई। वहीं, चेतन शर्मा और सुनील उर्फ नीती निवासी चंदौली के रूप में हुई। पुलकित और चेतन दोनों कार सेल परचेज का काम करते हैं। दोनों पार्टनर हैं। वहीं, चेतन ने ही सुनील उर्फ नीती को वारदात में शामिल किया। एसपी सुमित कुमार ने मामले की जांच सीआईए-टू प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार की टीम को सौंपी थी। टीम ने नरेश शर्मा का जिन भी व्यक्तियों के साथ पैसों का लेनदेन था, ऐसे करीब 25 से 30 व्यक्तियों से पूछताछ की।

वहीं, पानीपत से बूढ़नपुर नहर पर जाने वाले सभी लिंक रोड और जीटी रोड पर पेट्रोल पंप या अन्य स्थानों पर लगे करीब 70 से 80 सीसीटीवी फुटेज कैमरों में कैद फुटेज को खंगालने के बाद टीम को सीसीटीवी फुटेज में विभिन्न स्थानों पर नरेश की इटियोस कार के साथ एक स्वीफ्ट डिजायर कार चलती दिखी। जिसकी जांच की तो वह नारा गांव के एक मालिक की थी, पुलिस मालिक के पास पहुंची तो उन्होंने पैराडाइस मालिक को एफिडेविट पर बेचने के लिए देने की बात कही। जिसके बाद सोमवार देर शाम तीनों आरोपियों पुलकित मदान, चेतन और सुनील उर्फ निती को भैसवाल मोड़ पानीपत से काबू कर पूछताछ की तो आरोपियों ने प्रॉपर्टी डीलर नरेश शर्मा की हत्या करने की वारदात का खुलासा कर दिया।

पैराडाइस कार बाजार के मालिक पुलकित ने कारोबार में पार्टनर चेतन शर्मा को प्रॉपर्टी डीलर द्वारा दबाव डालने की बात बताई तो चेतन ने कहा कि हम दोनों अकेले इसकी हत्या नहीं कर सकते, इसलिए चेतन शर्मा ने अपने ही गांव चंदौली के निवासी सुनील उर्फ नीति को एक लाख रुपये देकर वारदात में शामिल किया। उसके बाद उसे रेकी करने का काम दिया गया। सुनील ने आरोपी चेतन शर्मा और पुलकित को पल पल की सूचना दी। वहीं, वारदात के दिन भी आरोपी सुनील ने प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस से निकलने से पहले ही उन्हें सूचना दे दी थी। 

आरोपियों ने अपने शातिर दिमाग का प्रयोग करते हुए नहर पर जाने के लिए लिंक रास्तों का प्रयोग किया। आरोपियों को डर था कि जीटी रोड से जाएंगे तो टोल या अन्य स्थानों पर लगे सीसीटीवी केमरों में उनकी फुटेज कैद हो जाएगी, जिससे वह बाद में पकड़े जाएंगे। आरोपियों ने नरेश शर्मा की कार पर लगी नंबर प्लेट व उसकी जेब से उसका मोबाइल फोन निकालकर रास्ते में तोड़कर फेंक दिया था और गले में पहनी सोने की चेन निकाल ली थी।

पूरी वारदात में आरोपियों ने आपस में एक दूसरे से कभी फोन पर बात नहीं की। वहीं, वारदात के दिन भी आरोपियों ने अपने फोन ऑफिस पर ही छोड़ दिए थे। वहीं, दूसरी वारदात में प्रयोग की गई गाड़ी स्विफ्ट डिजायर भी नारा के एक युवक की मिली। जिसने आरोपियों को बेचने के नाम पर एफिडेविट लेकर दे रखी थी। आरोपियों कोई भी ऐसा सबूत नहीं छोड़ा था, जिससे पुलिस उनके पास पहुंच सके।

नरेश शर्मा के लापता होने का केस जैसे ही उनके पास आया तो उन्होंने सीआइए टू और डिटेक्टिव टीम के करीब 30 स्टाफ कर्मियों को शामिल किया। वहीं, ऑफिस से लेकर उसके घर तक की सभी सीसीटीवी फुटेज चेक की। उन्होंने बताया कि पांच दिन तक किसी भी स्टाफ कर्मियों ने न ही छुट्टी ली और न ही कोई रेस्ट किया। आरोपियों की लगातार धरपकड़ जारी थी।