बैंक में थे लाखों रुपये लेकिन घर में बाप-बेटे की हुई ऐसी दर्दनाक मौत

आगरा : उत्तर प्रदेश के आगरा के हल्का पीर मदन (नाई की मंडी) में बुधवार सुबह अधेड़ का शव चारपाई पर पड़ा मिला। उसका बेटा भी गंभीर हालत में दूसरी चारपाई पर पड़ा था। बेटे ने अपने पड़ोसी को फोन किया। पड़ोसियों ने जब अधेड़ को मरा देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बेटे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया। करीब एक घंटे बाद उसकी भी मौत हो गई। मृतकों के परिजनों ने बताया कि घर में पिता-पुत्र दोनों ही रहते थे। काफी दिनों से बीमार थे। उनके खाते में पैसे भी थे। दोनों की बैंक में पांच लाख से ज्यादा की एफडी भी थी, लेकिन इलाज नहीं कराया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। हल्का पीर मदन में हेतचंद (65) पुत्र भारूमल अपने बेटे सोनू (24) के साथ रहते थे। हेतचंद की पत्नी करीब 20 साल पहले छोड़कर चली गई। परिवार के लोगों को नहीं पता कि वह अब कहां है। पिता-पुत्र धागे और पॉली बैग का काम करते थे। बुधवार सुबह सोनू ने पड़ोसी लक्की को फोन करके चाय मंगाई। लक्की जब चाय लेकर आया तो उसने देखा कि हेतचंद चारपाई पर मृत पड़ा है।
सोनू की हालत भी गंभीर है। उसने आसपास के लोगों को जानकारी दी। लोगों ने 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को बुलाया। थाना नाई की मंडी प्रभारी संजय कुमार त्यागी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सोनू को अस्पताल में भर्ती कराया। वहां करीब एक घंटे बाद उसने भी दम तोड़ दिया। सोनू फोन न करता  तो पड़े रहते शव : हेतचंद के पड़ोसियों ने बताया कि सोनू सुबह चाय के लिए लक्की को फोन नहीं करता तो दोनों के शव न जाने कब तक पड़े रहते। पड़ोसी राजवीर सिंह ने बताया कि घर पर ताला भी नहीं लगाते थे।  करीब तीन महीने से हेतचंद बाहर भी नहीं निकला था।
हेतचंद के पड़ोसियों ने बताया कि पिता-पुत्र दोनों खाना नहीं खाते थे। कभी बाजार से कचौड़ी तो कभी कुछ लेकर खा लेते थे। इसके बाद दो-दो दिन तक भूखे रहते थे। इसी के कारण दोनों को गंभीर बीमारियां थीं। पुलिस का कहना है कि पड़ोसियों से पूछताछ में पता चला है कि घर में चूल्हा था लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं करते थे। थाना पुलिस ने घर की तलाशी ली। इस दौरान घर से पुलिस को पुरानी करंसी मिली। करीब दो हजार  रुपये के थे। पुलिस ने बताया कि इसके अलावा घर  से नई करंसी भी मिली है। पड़ोसियों ने बताया कि पैसे की इतनी कमी तो नहीं थी कि दोनों लोग खाना भी न खा सकें। बीमार रहते थे। पुलिस की ओर से प्रशासन को बीमारी के चलते दो लोगों की मौत की जानकारी दी गई। सूचना पर प्रशासन की ओर से एसीएम पंचम वीरेंद्र कुमार मित्तल थाना नाई की मंडी पहुंचे। यहां हेतचंद की भतीजी पूजा और उसके पति नीरज से जानकारी ली। इसके बाद मृतकों के घर पर जाकर छानबीन की।
हेतचंद का घर दो मंजिल है। निचले तल पर हेतचंद और सोनू रहते थे। ऊपरी मंजिल पर छोटा भाई वासुदेव अपनी पत्नी शांति देवी और बेटी पूजा के साथ रहता था। करीब चार वर्ष पूर्व वासुदेव की भी मौत हो गई। मौत के बाद पूजा की शादी मारुति एन्क्लेव थाना जगदीशपुरा निवासी नीरज के साथ हो गई। शादी के बाद शांति देवी अपनी बेटी के पास रहने के लिए चली गईं। घर पर हेतचंद और सोनू अकेले रह गए। उन्हें कोई पानी देने वाला भी नहीं था। हेतचंद और सोनू के रिश्तेदार मात्र तीन लोग ही थे। वासुदेव की पत्नी शांतिदेवी, भतीजी पूजा और उसका पति नीरज। इसके अलावा उनका कोई भी रिश्तेदार नहीं था। शांति देवी ने बताया  कि वह समय-समय पर आती रहती थीं। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भी कहा था। लेकिन दोनों अस्पताल नहीं जाते थे। हेतचंद और सोनू के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टर केसी धाकड़ ने किया। उन्होंने बताया कि हेतचंद की मौत लंबी बीमारी के कारण हुई है। मौत से चार-पांच घंटे पहले तक उन्होंने कुछ नहीं खाया नहीं था। उनके आंतें सिकुड़ चुकी थीं। सोनू की मौत हृदयाघात से हुई। उन्होंने बताया कि रक्त नली में खून के थक्के जमे हुए थे। दोनों लोग काफी कमजोर थे।