ऑनलाइन सेक्स वर्कर्स ने बढ़ाई परेशानी

मुंबई: रेड लाइट इलाकों पर लगातार होने वाली कार्रवाई के कारण अब 'सेक्स वर्क' ऑनलाइन शिफ्ट हो रहा है। इससे इनकी उपलब्धता जितनी आसान होती जा रही है, वहीं इन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है। सबसे अधिक जहमत उठानी पड़ रही है एड्स नियंत्रण ‌विभाग को। ऐसे सेक्स वर्कर को ढूंढकर बीमारी से बचने के लिए उनकी काउंसलिंग करना या उनका इलाज शुरू करना मुश्किल होता जा रहा है।

बता दें कि रेड लाइट इलाकों में काम करने वाली सेक्स वर्कर्स को एचआईवी से बचाव के लिए जागरूक किया जाता था। लेकिन, आज तकनीक के चलते यह धंधा ऑनलाइन शिफ्ट होने से एड्स नियंत्रण के लिए काम करने वाली संस्थाओं को भी दिक्कत हो रही है। मुंबई डिस्ट्रिक्ट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (एमडैक्स) के अनुसार, ऑनलाइन की वजह से फैल रहे एचआईवी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए कई तरह के प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इसमें कस्टमर बनकर धंधे से जुड़े लोगों को जागरूक करने के अलावा, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के जरिए उन तक पहुंच बनाना जैसी मुख्य बातें हैं।  

एमडैक्स से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सेक्स का ज्यादातर धंधा अब डेटिंग ऐप के जरिए हो रहा है। कहीं भी, कभी भी सेक्स वर्कर पहुंच जाते हैं, इससे इन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है। एमडैक्स के सचिन काटकर ने बताया कि एस्कॉट सर्विस पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी हैं। इसके कारण एचआईवी के बहुत से ऐसे मामले हैं, जो पकड़ में नहीं आ रहे हैं, क्योंकि इनका कोई निश्चित स्थान नहीं है। इनके जरिए यह बीमारी एक से दूसरे में फैलने की संभावना काफी अधिक है।

सचिन ने बताया कि एचआईवी के मामलों को ढूंढने के लिए विभाग के साथ कई एनजीओ काम करते हैं। इनमें से कुछ एनजीओ ऑनलाइन सेक्स से जुड़े लोगों पर नजर रखते हैं। कुछ दिन से अलग-अलग डेटिंग ऐप के जरिए इस ग्रुप तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जो अब तक लगभग पहुंच से दूर थे। समय-समय पर एनजीओ की तरफ से ऐसे डेटिंग ऐप्स पर अकाउंट बनाए जाते हैं और सेक्स वर्कर को विश्वास में लेकर नियमित रूप से जांच कराने और सुरक्षित यौन संबंध के बारे में उन्हें जागरूक किया जाता है। सचिन के अनुसार, अपने शोध में पाया है कि मुंबई में ज्यादातर पुरुष संबंध रखने के लिए डेटिंग ऐप का सहारा लेते हैं। ऐसे में ऐसे ग्रुप को खास तौर से मॉनिटर कर रहे हैं।