जिला प्रशासन द्वारा बेघर बच्चों को बसेरा

ठाणे : कचरा चुननेवाले बच्चे अक्सर सड़कों को ही अपना घर मानकर वहीं सड़क किनारे फुटपाथ पर सो जाते हैं। इन बेघर बच्चों को रात के दौरान सड़क किनारे सोते वक्त परेशानियों का सामना न करना पड़े इसलिए जिला प्रशासन द्वारा बच्चों के लिए आश्रयगृह बनाया जा रहा है। बता दें कि कचरा चुननेवाले व सड़कों पर भीख मांगनेवाले बच्चे घर न होने के कारण सड़कों पर सोकर अपनी रात बिताते हैं। कई दफा सड़कों पर सो रहे बच्चे सड़क दुर्घटना और यौन शोषण के शिकार हो जाते हैं। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखकर सरकार ने ऐसे गरीब, अनाथ व छोटे-मोटे काम करनेवाले बच्चों के लिए रहने, खाने, सोने की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अनाथ व बेसहारा बच्चे दिनभर अपना काम कर रात के वक्त आश्रयगृह में सो सकते हैं और पौष्टिक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। इतना ही नहीं इन बच्चों को रात के वक्त विद्यालय की तरह शिक्षा भी दी जाएगी। आश्रयगृह में अधीक्षक, केअर टेकर, शिक्षक व मार्गदर्शक भी मौजूद होंगे जो बच्चों की देखभाल व मार्गदर्शन करेंगे। केंद्र सरकार प्रत्येक बच्चों के लिए प्रति माह २ हजार रुपए की निधी देनेवाली है। ठाणे जिले में कुल ८ आश्रयगृह बनाया जानेवाला है। कुल ४०० बच्चे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। ठाणे महिला व बाल कल्याण विभाग अधिकारी महेंद्र गायकवाड़ ने बताया कि इस योजना से बेघर बच्चों को सहारा मिलेगा। साथ ही उनका भविष्य बेहतर हो पाएगा। प्रत्येक आश्रयगृह के लिए २५ लाख रुपए की निधि खर्च की जाएगी, जिसमें कुल ५० बच्चे आराम से रह सकते हैं। इस आश्रयगृह में काउंसलिंग रूम, चिकित्सकीय रूम व भोजनालय की व्यवस्था मौजूद होगी।