मुंबई : उद्धव ठाकरे के लिए महाराष्ट्र सरकार से ज्यादा गठबंधन को साधने की है चुनौती

मुंबई : ठाकरे परिवार से आने वाले महाराष्ट्र के पहले सीएम के तौर पर उद्धव ने शपथ ले ली है, लेकिन उनके लिए सरकार चलाने से ज्यादा बड़ी चुनौती त्रिपक्षीय गठबंधन को साधे रखना होगा। एनसीपी और कांग्रेस को साधना उनके लिए एक चुनौती होगा। इस बाद का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि कई दौर की मीटिंग के बाद भी मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर फैसला नहीं हो सका है। कांग्रेस के एक नेता ने गुरुवार को कहा, 'सभी पार्टियों ने गृह, शहरी विकास, राजस्व, हाउसिंग ऐंड कोऑपरेशन मंत्रालयों पर दावा ठोका है। हमें उम्मीद है कि शरद पवार दखल देंगे। हमें लगता है कि समय पर सभी विवाद समाप्त हो जाएंगे और नई सरकार अच्छे से काम करना शुरू कर देगी।' इससे पहले बुधवार को पूर्व चीफ मिनिस्टर पृथ्वीराज चव्हाण ने स्पीकर का पद लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने डेप्युटी सीएम और एक अतिरिक्त मंत्री पद की मांग रखी थी। 

पृथ्वीराज चव्हाण ने भी पुष्टि की थी कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट से कहा था कि वह नई विधानसभा में स्पीकर का पद नहीं चाहते हैं। चव्हाण के करीबी सूत्रों का कहना था कि उनकी यह राय है कि सीएम रहे हुए शख्स को स्पीकर का पद नहीं संभालना चाहिए, प्रोटोकॉल मुख्यमंत्री से कम है। सूत्रों के मुताबिक चव्हाण ने इसलिए भी यह पद स्वीकार नहीं किया क्योंकि लंबे समय में यह उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के विपरीत होता। यही नहीं अब तक पूर्व सीएम अशोक चव्हाण को किसी भी मंत्रालय की जिम्मेदारी न मिलने से भी कांग्रेस का एक धड़ा निराश है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'हम मानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण को कैबिनेट में जगह दी जानी चाहिए थी। हालांकि भरोसा है कि ठाकरे कैबिनेट का जब विस्तार होगा तो इन नेताओं को भी मौका दिया जाएगा।'