ठाणे : सरकारी जमीन पर बसे परिवार भरेंगे सेवा शुल्क, सरकारी घर मिलने का रास्ता साफ

ठाणे : ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत वन जमीन, एमआईडीसी तथा सरकारी जमीन पर बसे लोगों पर सेवा शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से क्लस्टर एवं अन्य सरकारी गृह आवास योजनाओं के तहत उन्हें पक्का घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है। नए घरों पर सेवा शुल्क लगने की वजह से मनपा की तिजोरी में करीब ५० करोड़ रुपए की वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान तथा मुंब्रा-कलवा रेल लाइन से सटे हुए कई भागों में हजारों लोग झोपड़े बनाकर रहते हैं। उन्हें मनपा की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं पर वन जमीन पर होने की वजह से मनपा ने उनके झोपड़ों का कर निर्धारण नहीं किया है। इसी तरह वागले इस्टेट का कुछ परिसर एमआईडीसी के तहत आता है, यहां पर भी हजारों की संख्या में झोपड़े बने हैं। इनमें से कुछ झोपड़ों पर टैक्स लगा है और कुछ का बाकी है। वन जमीन तथा एमआईडीसी की जमीन पर रहनेवाले परिवारों को भी क्लस्टर डेवलपमेंट तथा अन्य सरकारी आवास योजनाओं का लाभ मिल सके इसके लिए पिछले बुधवार की महासभा में सर्वदलीय नगरसेवकों ने टैक्स के बदले सेवा शुल्क लगाने की मांग की थी, जिसे तत्कालीन पीठासीन अधिकारी एवं महापौर मीनाक्षी शिंदे ने मंजूर कर लिया था। प्रशासन द्वारा लिए गए इस निर्णय के मुताबिक वर्ष २०१४ के पहले और इस दौरान जितने भी घर बने हैं, उन्हें सेवा शुल्क के दायरे में लाना है।