मुंबई : राजीव गांधी के एक और हत्यारे को मिली राहत

मुंबई : पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का २८ साल पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है इस हत्याकांड में दोषी करार दिए गए बंदियों को मिल रही पैरोल। पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में उम्रवैâद की सजा काट रहे सात दोषियों में से एक एजी पेरारीवलन ३० दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आया था। पिछले २८ साल से जेल में बंद पेरारीवलन के पिता अस्वस्थ हैं और उनका इलाज चल रहा है। पिता के इलाज और कृष्णगिरि में अपनी भतीजी की शादी के लिए एजी पेरारीवलन १२ नवंबर से लेकर १३ दिसंबर के बीच पैरोल पर जेल से बाहर रहेगा। अदालत ने एजी पेरारीवलन को पुलिस एस्कॉर्ट देने का भी आदेश दिया है। और अब पेरारीवलन की तरह एक और दोषी रॉबर्ट पायस को मद्रास उच्च न्यायालय से ३० दिन की पैरोल मिल गई। बीते सप्ताह न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति आरएमटी टीका रमण की खंडपीठ ने पायस की याचिका पर यह आदेश दिया। पायस ने याचिका में बेटे के विवाह की तैयारी के लिए पैरोल मांगी थी। पायस को २५ नवंबर से २४ दिसंबर तक के लिए सशर्त पैरोल दी गई है। इसकी शर्तों में पायस के मीडिया, राजनीतिक दलों या जाने-माने लोगों से बातचीत करने पर पाबंदी है। इसके अलावा उसे हलफनामा देना होगा कि वह अच्छा आचरण रखेगा और लोक शांति को भंग नहीं करेगा।

२१ मई १९९१ को एक आत्मघाती धमाका कर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। घटना से एक साल पहले श्रीलंका इस आत्मघाती हमले की साजिश रची गई थी। एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन ने अपने गुप्त ठिकाने पर अपने खास सहयोगी बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरूगन और शिवरासन के साथ मिलकर इस हमले की योजना बनाई थी। प्रभाकरन से राजीव की हत्या का फरमान लेने के बाद बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा १९९१ की शुरुआत में चेन्नई पहुंचे। लेकिन चेन्नई में नलिनी, मुरुगन, भाग्यनाथन और शिवरासन मानवबम बनने के लिए किसी को तैयार नहीं कर पाए। अंतत: समुद्र के रास्ते फिर जाफना पहुंंचे शिवरासन के साथ प्रभाकरन ने उसकी चचेरी बहनों धनू और शुभा को हिंदुस्थान भेज दिया। शिवरासन अप्रैल की शुरुआत में धनू और शुभा को लेकर चेन्नई पहुंचा। वह दोनों को नए ठिकाने पर ले गया। शिवरासन ने टारगेट का खुलासा किए बिना बम एक्सपर्ट अरिवेयू से एक ऐसा बम बनाने को कहा जो महिला की कमर में बांधा जा सके। शिवरासन के कहने पर अरिवेयू ने एक ऐसी बेल्ट डिजाइन की, २१ मई को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की रैली थी। राजीव गांधी ने माला लिए आत्मघाती धनु को देखते हुए कहा कि सबको पास आने का मौका मिलना चाहिए। उन्हें नहीं पता था कि वो जनता को नहीं मौत को पास बुला रहे हैं। धनु ने माला पहनाई, पैर छूने के लिए झुकी और धमाका हो गया। यह लिट्टे का हिंदुस्थान पर सबसे बड़ा हमला था। सन् १९९८ में २६ दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के निचली अदालत के निर्णय से लेकर २०१६ में सात लोगों को ताउम्र जेल में रखने के सुप्रीम कोर्ट के पैâसले तक राजीव गांधी हत्याकांड में कई मोड़ आए। आज २८ साल बीत जाने के बाद भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। पेरारीवलन को इससे पहले २०१७ में इसी तरह के कारण के लिए दो महीने की पैरोल मिली थी। इसी तरह इसी मामले की एक अन्य दोषी नलिनी को अपनी बेटी की शादी के लिए इसी साल जुलाई महीने में ३० दिनों की पैरोल मिली थी।