मुंबई : राज्यपाल हैं कि मानते नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की फिर की गई अवहेलना

मुंबई : भाजपा के पास बहुमत नहीं होने के बावजूद चोरी से अल सुबह शपथ दिलानेवाले राज्यपाल हैं कि मानते नहीं। उन्होंने पूर्व में सरकार बनाने के लिए जब शिवसेना को एक दिन का समय दिया था तो उसे बढ़ाने से इनकार कर दिया था। राकांपा को तो आधा दिन का ही समय दिया क्योंकि दोपहर १२ बजे जब राकांपा ने समय बढ़ाने के लिए वक्त मांगा तो उन्होंने उसी वक्त राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की चिट्ठी दिल्ली भेज दी थी। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट कराने का पैâसला सुनाया तो प्रोटेम स्पीकर जब चुनने का वक्त आया तो राज्यपाल ने फिर अपनी मनमानी कर डाली। परंपरा रही है कि सदन के सबसे अनुभवी शख्स को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है। ऐसे में कांग्रेस के बालासाहेब थोरात इस पद के दावेदार थे पर राज्यपाल ने भाजपा के कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर चुना।

खास बात है कि प्रोटेम स्पीकर ही सभी विधायकों को शपथ दिलाएंगे और फिर फ्लोर टेस्ट भी कराएंगे। प्रोटेम स्पीकर को सभी पार्टियां अपने व्हिप की जानकारी भी देंगी। सबसे अधिक बार चुनकर आए विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है, जिसे राज्यपाल मनोनीत करते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में वरिष्ठता के आधार पर ६ नाम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेजे गए। इनमें कांग्रेस के बालासाहेब थोरात पहले और भाजपा के कालिदास कोलंबकर के नाम भी दूसरे स्थान पर थे। इन दोनों नेताओं के अलावा कांग्रेस के के.सी. पडवी, बहुजन विकास आघाड़ी पार्टी के हितेंद्र ठाकुर, पूर्व स्पीकर और एनसीपी नेता दिलीप वलसे पाटील और भाजपा के बबनराव पाचपुते के नाम राज्यपाल को भेजे गए थे। पिछले साल २०१८ में कर्नाटक विधानसभा में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। तब राज्यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा नेता के.जी. बोपैया को प्रोटेम स्पीकर चुन लिया जबकि सदन में कांग्रेस के आर.वी. देशपांडे सबसे अनुभवी विधायक थे।