गर्भावस्था में महिलाएं दर-ब-दर, बंद पड़ी हैं सनॉग्रफी मशीनें

मुंबई : सीएसएमटी स्थित कामा अस्पताल कहने को तो महिलाओं और बच्चों का विशेष अस्पताल है, लेकिन यहां गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली सामान्य सनॉग्रफी तक की सुविधा नहीं है। नतीजतन गर्भवती महिलाओं को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है। कामा अस्पताल विशेषकर महिलाओं के लिए है, लेकिन तकरीबन एक महीने से यहां सनॉग्रफी मशीन बंद होने के कारण अस्पताल आने वाली महिलाओं को या तो जेजे या फिर प्राइवेट अस्पतालों में जाने को कहा जाता है। प्रशासन का दावा है कि गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली सनॉग्रफी के अलावा अन्य सनॉग्रफी की जांचें की जा रही हैं, लेकिन मरीज और परिजन के अनुसार, कोई भी सनॉग्रफी नहीं हो रही है। 5 महीने की गर्भवती महिला सुजाता को अस्पताल की तरफ से नियमित जांच और सनॉग्रफी के लिए कामा अस्पताल बुलाया गया था। मंगलवार को वह डॉक्टर से जांच कराने के बाद जब सनॉग्रफी कराने पहुंचीं, तो वहां उपस्थित रेडियोलॉजिस्ट ने मशीन बंद होने की बात कहकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

गिरगांव के रहने वाले मनोज कुमार भी अपनी गर्भवती पत्नी की सनॉग्रफी जांच कराने के लिए कामा अस्पताल आए थे, लेकिन मशीन बंद होने के कारण उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ा। एनबीटी से बात करते हुए मनोज ने बताया कि एक महीने पहले भी वे सनॉग्रफी के लिए कामा अस्पताल में आए थे। उस समय भी मशीन खराब होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा था। दुकान पर काम करने वाले मनोज ने बताया कि अस्पताल में सुविधा न मिलने के कारण अब उन्हें प्राइवेट सेंटर पर जाकर जांच करानी होगी, जो आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से उनके लिए मुश्किल पैदा करने वाली है, लेकिन गर्भवती महिला और भ्रूण की बेहतरी के लिए वह किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते।

कोलाबा की रहने वाली पांच महीने की गर्भवती गायत्री शुक्ला भी मंगलवार को सनॉग्रफी के लिए कामा अस्पताल गई थीं। पहले तो उन्हें सनॉग्रफी के लिए कामा में इधर से उधर दौड़ाया गया। फिर मशीन बंद होने की बात कहकर जीटी अस्पताल रैफर कर दिया। जब गायत्री जीटी अस्पताल पहुंचीं तो पता चला कि मशीन खराब होने के कारण वहां भी सनॉग्रफी बंद है। गायत्री के साथ उनकी बहन का पांच साल का बेटा भी था, जिसे पेट में दर्द होने के बाद डॉक्टरों ने सनॉग्रफी की जांच के लिए बोला गया था। कामा, जीटी और सेंट जॉर्ज का चक्कर लगाने के बाद कहीं भी उनकी जांच नहीं हो सकी। इस बारे में जब एनबीटी ने जीटी अस्पताल से बात की तो अस्पताल प्रशासन का कहना था कि उनके यहां गर्भवती महिलाओं की सनॉग्रफी होती ही नहीं, वहीं मशीन खराब होने के कारण फिलहाल सामान्य सनॉग्रफी भी बंद है।

प्रसूति रोग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान सनॉग्रफी कराना बेहद जरूरी होता है। इससे न केवल भ्रूण के विकास के बारे में जानकारी मिलती है, बल्कि गर्भवती की स्थिति का भी सही से पता लगता है। जेजे अस्पताल के प्रसूति रोग विशेषज्ञ अशोक आनंद ने कहा कि डिलिवरी से पहले कम से कम पांच बार सनॉग्रफी की जांच कराना बेहद जरूरी है।