सुनवाई का आखिरी दिन, चार पक्षों को बहस के लिए मिलेंगे 45-45 मिनट, जवाब के लिए मुस्लिम पक्ष को मिलेगा 1 घंटा

नई दिल्ली: अयोध्या मामले (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ बुधवार को आखिरी सुनवाई करेगी. मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रामलला के वकील सीएस वैधनाथन से कहा कि वे बुधवार को 45 मिनट बहस कर सकते हैं. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने पूछा कि क्या मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ पर भी बुधवार को ही बहस होगी? कोर्ट ने कहा बुधवार को एक घंटा मुस्लिम पक्षकार जवाब देंगे. चार पक्षकारों को 45-45 मिनट मिलेंगे. अयोध्या मामले की सुनवाई बुधवार को ही खत्म होने की उम्मीद है. मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर भी आज ही सुनवाई हो सकती है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक हिन्दू पक्ष ने दलील दी कि भारत विजय के बाद मुगल शासक बाबर द्वारा करीब 433 साल पहले अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ‘ऐतिहासिक भूल' की गयी थी और अब उसे सुधारने की आवश्यकता है.

पीठ के समक्ष एक हिन्दू पक्षकार की ओर से पेश पूर्व अटार्नी जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण ने कहा कि अयोध्या में कई मस्जिदें हैं जहां मुस्लिम इबादत कर सकते हैं लेकिन हिन्दू भगवान राम का जन्म स्थान नहीं बदल सकते. सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य द्वारा 1961 में दायर मामले में प्रतिवादी महंत सुरेश दास की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि विदेशी शासक बाबर द्वारा की गयी ऐतिहासिक भूल को सुधारने की जरूरत है. बाबर ने भगवान राम के जन्म स्थान पर मस्जिद का निर्माण कर ऐतिहासिक भूल की और कहा कि मैं बादशाह हूं और मेरा आदेश ही कानून है.

उन्होंने कहा, ‘अयोध्या में मुस्लिम किसी भी अन्य मस्जिद में इबादत कर सकते हैं. अकेले अयोध्या में 55-60 मस्जिदें हैं. लेकिन, हिंदुओं के लिए यह भगवान राम का जन्म स्थान है...जिसे हम बदल नहीं सकते.'

संविधान पीठ ने परासरण से परिसीमा के कानून, विपरीत कब्जे के सिद्धांत और अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि से मुस्लिमों को बेदखल किये जाने से संबंधित अनेक सवाल किये. पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या मुस्लिम अयोध्या में कथित मस्जिद छह दिसंबर, 1992 को ढहाये जाने के बाद भी विवादित संपत्ति के बारे में डिक्री की मांग कर सकते हैं?

पीठ ने परासरण से कहा, ‘वे कहते हैं, एक बार मस्जिद है तो हमेशा ही मस्जिद है, क्या आप इसका समर्थन करते हैं.' इस पर परासरण ने कहा, ‘‘नहीं, मैं इसका समर्थन नहीं करता. मैं कहूंगा कि एक बार मंदिर है तो हमेशा ही मंदिर रहेगा.'