बेस्ट के खर्च पर मनपा रखेगी नजर

मुंबई : घाटे में डूबी बेस्ट को बचाने के लिए मनपा की ओर से भरसक प्रयास किया जा रहा है। मनपा बेस्ट प्रशासन के कर्ज को कुछ हद तक खत्म करने के लिए आवश्यक निधि भी दे  रही है। मनपा अब तक लगभग 1700 करोड़ और 400 करोड़ रुपए दे चुकी है। मनपा द्वारा दिए जा रहे पैसों का सदुपयोग हो रहा है कि नहीं इसके लिए स्थाई समिति अध्यक्ष यशवंत जाधव ने मनपा को निर्देश दिया है कि बेस्ट को दिए गए पैसों का बेस्ट ने किन-किन सुधारों में उपयोग किया उसकी रिपोर्ट और खर्च का क्यौरा अतिरिक्त आयुक्त लें और  पैसों का सही उपयोग हो रहा है कि नहीं इस पर भी नजर रखने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि कर्ज में डूबे बेस्ट उपक्रम को बचाने के लिए और मुंबई की जनता को सस्ती दर  में परिवहन सेवा मिलती रहे, इसके लिए मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी ने बेस्ट को कर्ज से उबारने के लिए निधि देने का निर्णय लिया। मनपा आयुक्त ने बेस्ट को घाटे से उबारने के  लिए कई सुझाव भी दिए। जिनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण सुझाव था बेस्ट से दूर हुए यात्रियों को दोबारा बेस्ट की ओर वापस लाने का। जिसके लिए मनपा के निर्देश पर बेस्ट के   किराए में भारी कटौती करने का निर्देश दिया गया था, जिसका बेस्ट ने पालन भी किया। बेस्ट को इसका अच्छा लाभ भी मिल रहा है। बेस्ट में टिकट दर कम होने से यात्रियों की  संख्या में भारी इजाफा हुआ है। मनपा आयुक्त के इस निर्णय से टैक्सी और ऑटो के शेयर भाड़े पर बड़ा प्रभाव पड़ा है और सड़क पर ट्रैफिक समस्या भी कुछ हद तक दूर हुई है। मनपा द्वारा घाटे से उबारने के लिए बेस्ट को पहले 600 करोड़ और फिर 1136 करोड़ रुपए। इस तरह कुल 1700 करोड़ और अब 400 करोड़ दिए गए। मनपा द्वारा दी जा रही  इतनी बड़ी रकम पर मनपा विरोधी पक्ष नेता रविराजा ने कहा कि जिस उपयोग के लिए बेस्ट को पैसे दिए जा रहे हैं, उसका बेस्ट की ओर से सद्उपयोग किया जा रहा है क्या?   उन्होंने मनपा के अतिरिक्त आयुक्त तक के अधिकारी से बेस्ट के कामकाज और पैसों के खर्च पर नजर रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिए गए पैसों से बेस्ट पर लदा कर्ज  लौटाया गया क्या? बेस्ट ने अपने बेड़े में बसों की संख्या बढ़ाने और 6 माह में बसों की संख्या 7 हजार तक ले जाने का निर्णय लिया गया था, जिससे यात्रियों की संख्या बढ़ने और  निरंतर हो रहे घाटे से निजात मिलने की ओर क्या कदम उठाया गया, उस ओर नजर रखने की मांग की।

उनकी मांग का सर्वपक्षीय सदस्यों ने समर्थन किया। रविराजा ने कहा कि इसके पहले दिए गए पैसों का क्या किया? कितना कर्ज लौटाया गया और बेस्ट की बसों की संख्या बढ़ाने के   लिए क्या कदम उठाए गए, इसकी कोई जानकारी बेस्ट प्रशासनं ने अब तक नहीं दी है, जबकि मनपा तीसरी बार पैसा दे रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई की जनता के टैक्स का पैसा  फिजूल न खर्च हो, जनता को इसका फायदा मिले। इसको लेकर मनपा अधिकारियों को ध्यान देने की उन्होंने जरूरत बताई। रविराजा ने कहा कि मनपा ने बेस्ट को 1200 करोड़  रुपए बैंकों का कर्ज लौटाने के लिए दिए थे, लेकिन बेस्ट ने मात्र 550 करोड़ रुपए ही बैंक का कर्ज लौटाने में उपयोग किया। बाकी सेवानिवृत्त कर्मचारियो की ग्रेच्युटी आदि पर खर्च किया। 200 करोड़ रुपए ठेकेदारों को देने का आरोप लगाते हुए रविराजा ने कहा कि मनपा ने जिस काम के लिए बेस्ट को पैसे दिए उसका सही उपयोग नहीं किया। रविराजा के  उठाए सवाल का मनपा सदन की नेता विशाखा राउत राकांपा नेता रार्खी जाधव, सपा नेता रईश शेख और भाजपा नेता प्रभाकर शिंदे ने भी समर्थन किया। नेताओं ने मांग की कि  मनपा की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बेस्ट के कामकाज पर मनपा के अतिरिक्त आयुक्त द्वारा नजर रखी जानी चाहिए।