अमेरिका का नया VISA नियम, ग्रीन कार्ड की चाहत रखने वाले भारतीयों को दे सकता है झटका

अमेरिका अब विदेशियों को ग्रीन कार्ड नहीं देगा या फिर यह कहें कि वहां ग्रीन कार्ड लेना अब और भी मुश्किल होने जा रहा है। ट्रंप प्रशासन 60 दिनों के बाद एक ऐसा नियम लाने जा रही है, जिसमें यह प्रावधान किया गया है। इस नियम के मुताबिक, अमेरिका बाहर के देशों से आए लोगों को ग्रीन कार्ड जारी नहीं करेगा और ना ही उन्हें अस्थायी तौर पर जारी किसी वीजा को बढ़ाने की इजाजत दी जाएगी। ऐसे लोगों में वे शामिल हैं जिन्हें फूड स्टाम्प और हाउसिंग रेंट जैसे किसी भी अन्य तरीके की सरकारी सुविधा मिल रही है। माना जा रहा है कि भारतीयों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

ट्रंप प्रशासन ने कानूनी आव्रजकों के अमेरिकी नागरिक बनने की राह को और मुश्किल बनाते हुए सोमवार को कहा कि 'फूड स्टांप' या 'हाउसिंग असिस्टेंस' जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का लाभ लेने वालों को ग्रीन कार्ड देने से इनकार किया जा सकता है। गृह सुरक्षा मंत्रालय की ओर से जारी नये नियम में स्पष्ट किया गया है कि इन सुविधाओं का लाभ ले रहे लोगों को ग्रीन कार्ड (कानूनी स्थायी निवास) नहीं दिया जाएगा। उन्हें दूतावास के अधिकारी को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे अमेरिकी सरकार के उन कार्यक्रमों का लाभ नहीं लेंगे जो उसके नागरिकों के लिए हों।

अमेरिका आने की चाह रखने वाले विदेशियों को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि उनके पास पर्याप्त आय है जिससे वे अमेरिका की सरकारी सुविधाओं पर बोझ नहीं बनेंगे। वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक नये नियम के प्रभावी होने के बाद उनकी आय ज्यादा होना जरूरी हो जाएगा। व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि इस कदम से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि जो लोग अमेरिका आना चाहते हैं या यहां बसना चाहते हैं उन्हें अपनी जरूरतें खुद पूरी करनी होंगी और वे सार्वजनिक लाभ पर निर्भर नहीं होंगे।

ग्रीन कार्ड पर प्रत्येक देश के हिसाब से लगी सीमा से मुख्यत: फायदा भारत जैसे देशों से एच-1 बी वर्क वीजा पर काम कर रहे हाई-टेक पेशेवरों को फायदा होगा जिनके लिए ग्रीन कार्ड का इंतजार एक दशक से भी ज्यादा वक्त का है। हाल के कुछ अध्ययनों में कहा गया कि एच-1 बी वीजा प्राप्त भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए यह इंतजार 70 साल से भी ज्यादा का है।