महालक्ष्मी एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए वे 15 घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं थे

मुंबई : मुंबई के वांगनी में शनिवार को बाढ़ के पानी में फंसी महालक्ष्मी एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए वे 15 घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। ट्रेन के बाहर बढ़ता उल्हास नदी का पानी और अंदर पीने के पानी की कमी से जूझते लोग जब सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे, तब जाकर राहत की सांस ले सके। हालांकि, कई ऐसे लोग थे जो अपनी मंजिल तक न पहुंच पाने पर हताश थे। 

भूख-प्यास से परेशान 

ऐसे ही एक शख्स थे, अपनी दादी की पहली बरसी के लिए जा रहे इंजिनियरिंग के तीसरे साल के छात्र शिवम घाडगे। शिवम ट्रेन से बाहर निकलने के बाद जल्दी सुरक्षित जगह पर पहुंचने के लिए तेज चलने लगे। भूख से बेहाल शिवम को ज्यादा दुख इस बात का था कि वह घर पर पूजा में शामिल नहीं हो सके। उन्हीं की तरह मार्शल आर्ट्स एक्सपर्ट निनाद उपाध्याय भी 14 घंटे भूखे-प्यासे ट्रेन में फंसे रहे। 

बाहर बढ़ता पानी, अंदर सांप 

निनाद ने बताया कि कैसे ट्रेन के बाहर उल्हास नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ यात्रियों का डर भी बढ़ रहा था। वह सारी रात जागते रहे। बाहर पानी और अंदर भूख से लड़ते यात्रियों के बीच एक सांप पहुंचने से हड़कंप मच गया। घाटकोपर की रहनेवाली आशा वारुडे ने बताया कि किसी तरह सांप को बाहर निकाला गया। उन्हें खुशी है कि सभी यात्री सुरक्षित ट्रेन से बाहर निकाले जा सके।