फेसबुक पर अंग्रेजी और हिंदी में लिखे इस नोट में उसने लिखा, वह भगवान से पूछेगा कि उसे ऐसा क्यों बनाया?

मुंबई : 20 वर्षीय अविंशु पटेल की आत्महत्या और उसके खुदकुशी नोट ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। उसका शव पिछले हफ्ते (बुधवार) तमिलनाडु की राजधानी चेन्नै के नीलंकरई बीच पर मिला। उसने कथित तौर पर समलैंगिक होने के कारण अपनी जान दी। मौत को गले लगाने से पहले उसके द्वारा लिखे गए सूइसाइड नोट को जिसने भी पढ़ा, वह सतब्ध रह गया। उसने यह सूइसाइड अपनी फेसबुक वॉल पर अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में लिखा और कहा कि वह भगवान के पास जाकर पूछेगा कि उसे ऐसा क्यों बनाया? अविंशु को प्यार से लोग अवी कहते थे। वह मूलरूप से मुंबई का रहने वाला था और पिछले महीने ही चेन्नै के एक स्पा में काम करने आया था। फेसबुक पर 1750 शब्दों के सूइसाइड नोट में उसने कहा कि वह गे है, इसलिए उसे परेशान किया जा रहा है। उसने लिखा, 'लोग मेरे शारीरिक हाव-भाव से नफरत करते हैं। मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश करता हूं, लेकिन यह स्वाभाविक रूप से मेरे शरीर की गतिविधियों में दिखाई देती हैं। वे (लोग) मुझसे नफरत करते हैं, वे मेरे पीठ पीछे मेरा मजाक उड़ाते हैं...वे मुझे हिजड़ा, छक्का और बैलया कहते हैं...मुझे बहुत अफसोस है कि मेरा शरीर एक लड़के का था, लेकिन मेरा व्यवहार एक लड़की की तरह था।' 

अविंशु अपने घर का इकलौता कमाने वाला था। वह नंदुरबार जिले के शाहदा में रहता था। उनके पिता रवींद्र सब्जी विक्रेता थे लेकिन दिल की बीमारी से पीड़ित होने के कारण वह काम नहीं कर पाते थे। अवि के बचपन का नाम अमोल था। आत्महत्या करने से पहले दो जुलाई की शाम 5 बजे के आसपास उसने अपने रूममेट सहित कुछ अन्य लोगों से इस बात का जिक्र किया था कि वह मरने जा रहा है। अवि के चाचा दीपक ने बताया कि लगभग पांच महीने पहले अवि की मां ने उसके ऊपर शादी करने का दबाव बनाया था तब वह उसने पास आया था। घर में तनाव था, लेकिन बाद में उसे चेन्नै काम करने के लिए भेज दिया गया। 

लगभग एक साल पहले अवि ने नंदुरबार में विशेषज्ञ रेखा चौधरी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सलून का प्रशिक्षण लिया था। तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद वह कुछ महीनों के लिए मुंबई आ गया और फिर चेन्नै। फेसबुक में लिखी गई पोस्ट में उसने रेखा चौधरी का जिक्र करते हुए कहा कि वह उसे एक संरक्षक के तौर पर समझाती थीं। रेखा ने बताया कि उन्हें लगता है कि चेन्नै में अवि बहुत खुश था। उसके सहयोगी उनके दोस्त बन गए थे और वह उनके काम से प्यार करते थे। अपने पार्टनर का जिक्र करते हुए उसने पोस्ट में लिखा, 'मुझे लगता है कि वह शक करती थी कि अवि उसे धोखा देगी।' 

पिछले साल सितंबर में आईपीसी की धारा 377 को हटाने के बावजूद भारत में एलजीबीटीक्यूआई के लोगों का उत्पीड़न जारी है। अवि की फेसबुक पोस्ट इस बात का साफ संकेत है। उसने लिखा, 'मैं मरकर भगवान से पूछने जा रहा हूं कि उन्होंने मुझे ऐसा क्यों बनाया। मैं उनसे कहूंगा कि भारत में समलैंगिक लोगों को पैदा न करें क्योंकि भारत में लोग समलैंगिक लोगों से नफरत करते हैं। वे परिवार को दोष देते हैं और उन्हें सभी प्रकार के नामों से बुलाते हैं।' 

ऐक्टिविस्ट हरीश अय्यर ने कहा कि अवि उन्हें कुछ महीने पहले हताश अवस्था में कहा था कि वह लोगों द्वारा तंग किए जाने से परेशान है। लोग उसे सड़क चलते शर्मिंदा करते हैं। अपने लोग या दोस्त उसे इस तरह स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अवि की मौत ने समुदाय के लोगों को हिला दिया है। लोगों का इस समुदाय के उत्पीड़न की ओर ध्यान गया है और अब विभिन्न समूह एक साथ आ रहे हैं और ऑनलाइन अभियान से लेकर सड़क तक अभियान चला रहे हैं।