जाती प्रमाणपत्र के नाम पर रिश्वत लेने वाले अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश

मुंबई : जाति प्रमाणपत्र को लेकर मुंबई के नगरसेवक से 50 लाख रुपए की रिश्वत मांगने वाली तीन सदस्यीय समिति के सदस्यों को तत्काल निलंबित करने का निर्देश सभापति रामराजे  निंबालकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को दिया। सोमवार को विधानपरिषद में शिवसेना के सदस्य अनिल परब ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से मुद्दा उपस्थित किया। जिसमें अनिल परब  ने कहा कि जुलाई 2018 के मानसून सत्र में हमने नगरसेवक से 50 लाख रुपए रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों का मुद्दा सदन में उपस्थित किया था। जिसके जवाब में सभापति ने  इस मुद्दे से जुड़े अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि संबंधित  अधिकारी मैट में चले जाते है और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। इसके जवाब में सामाजिक न्यायमंत्री सुरेश खाड़े ने कहा कि जांच शुरू है। रिपोर्ट आने के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खाडे के इस जवाब से असंतुष्ट शिवसेना सदस्य अनिल परब ने हंगामा शुरू कर दिया। इसे देखते हुए सभापति ने मुख्यमंत्री को जाति  प्रमाणपत्र देने को लेकर बनाई गई तीन सदस्यीय समिति के अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया। बता दें कि अनुसूचित जाति, जमाती विमुक्त जाति, भटक्या  जमाति और अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस में प्रवेश के लिए समिति से मिलने वाले जाति प्रमाणपत्र में बड़ा भ्रष्टाचार होने का मुद्दा सदन में अनिल परब  ने उपस्थित किया था। जिसमें परब ने सभापति से मांग की थी कि नगरसेवक से 50 लाख रुपए रिश्वत लेने वाले समिति के अध्यक्ष उस रकम को नगरसेवक को वापस करें।